Thursday, June 17, 2021
Homeअन्य खेलमिसालः एक दिव्यांग हाथ के साथ अर्जुन पुरस्कार तक का सफर तय...

मिसालः एक दिव्यांग हाथ के साथ अर्जुन पुरस्कार तक का सफर तय करने वाले शरत गायकवाड़

आपमें किसी चीज़ की कमी ही आपकी दिव्य शक्ति बन सकती है, इस बात को सिद्द कर दिखाया है शरत गायकवाड़ ने। शरत एक दिव्यांग हाथ के साथ अर्जुन पुरस्कार तक का सफर तय करने वाले सख़्स हैं। इनका बायाँ हाथ जन्म से ही पूरी तरह विकसित नहीं है। इसके बावजूद वे 40 से अधिक नेशनल व इंटरनेशनल मेडल जीत चुके हैं। मालूम हो कि कक्षा चार से ही तैराकी सीखना शुरू करने वाले शरत गायकवाड़ बंगलूरु के रहने वाले हैं।

आपको बता दें कि 10 मई 1991 को बेंगलुरु में जन्मे शरत की बचपन से ही खेलों की तरफ रुचि थी। वे बेंगलुरु के लिटिल फ्लॉवर पब्लिक स्कूल के छात्र रहे। उस स्कूल का एक नियम था, जिसके तहत हर छात्र को स्विमिंग क्लास जाना अनिवार्य रहता था। स्कूल के इसी नियम ने शरत के स्विमिंग करियर की नींव रखी। शुरुआत में शरत के माता-पिता उनके बाएं हाथ की समस्या की वजह से उन्हें स्विमिंग क्लास नहीं भेजना चाहते थे, लेकिन बेटे की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा। शरत ने 9 वर्ष की आयु में स्विमिंग शुरू की।

ग़ौरतलब है कि शरत ने अपने अभियान की शुरूआत 200 मीटर व्यक्तिगत मेडल स्पर्धा में रजत पदक के साथ की। उन्होंने इसके बाद 100 मीटर बटरफ्लाई, 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक, 100 मीटर बैकस्ट्रोक और 50 मीटर फ्रीस्टाइल में कांस्य पदक जीते। इसके साथ ही शरत ने अंत में प्रशांत करमाकर, स्वपनिल पाटिल और निरंजन मुकुंदन के साथ मिलकर चार गुणा 100 मीटर मेडल रिले का कांस्य पदक भी जीता।

ये बात भी ग़ौर करने वाली है कि शरत गायकवाड़ ने पैरा एशियाई खेलों में इतिहास रचते हुए एक प्रतियोगिता में छह पदक जीते हैं और इस तरह कई खेल वाली इस प्रतियोगिता में किसी भारतीय द्वारा सबसे अधिक पदक जीतने के दिग्गज धाविका पीटी उषा के रिकॉर्ड को भी शरत गायकवाड़ ने तोड़कर दिखा दिया है। वास्तव में शरत गायकवाड़ हौसले की एक बड़ी मिसाल हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments