Friday, May 7, 2021
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दुनिया का इकलौता खिलाड़ी जिसने 2800 से ज्यादा विकेट और 50 हजार से ज्यादा रन बनाए

इंग्लैंड के महान क्रिकेटर और फादर ऑफ क्रिकेट डब्लू जी ग्रेस एकमात्र ऐसे क्रिकेटर रहे हैं, जिनके खेल को देखने के लिए दर्शकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती थी। इंग्लैंड के कंट्री ग्राउंड के दरवाजे पर ये बात साफ लिखी थी कि सामान्य मैचों के टिकट के दाम 3 अंग्रेजी सिक्के और डब्लू जी ग्रेस के मुकाबले देखने हैं, तो 6 अंग्रेजी सिक्के चुकाने होंगे।

आधुनिक क्रिकेट में दो टीमों के राइवलरी को देखने के लिए दर्शकों में उत्साह देखने को तो मिलता है, जिसमें भारत-पाकिस्तान, इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका-ऑस्ट्रेलिया की भिड़ंत रोमांचक रही है। लेकिन ऐसा कम हुआ है, जब किसी एक क्रिकेटर की वजह से मैच के टिकट का दाम घट-बढ़ जाए।

जानें कौन हैं ग्रेस

18 जुलाई सन् 1848 को डब्लू जी ग्रेस(विलियम गिलबर्ट ग्रेस) का जन्म ब्रिस्टल में हुआ था। वह बेहतरीन ऑलराउंडर थे, बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग की तीनों विधा में वह पारंगत थे। ग्रेस को लोग ‘चैंपियन’ और ‘डॉक्टर’ उपनामों से भी जानते हैं, लेकिन उनकी पहचान उनकी लंबी दाढ़ी थी। उन्होंने ही आधुनिक क्रिकेट की बुनियाद रखी थी और इसीलिए उन्हें फादर ऑफ क्रिकेट कहते हैं।

सन् 1880 में किया था डेब्यू

डब्लू जी ग्रेस ने सन् 1880 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 32 वर्ष की उम्र में अपना टेस्ट करियर शुरू किया था। ये वह दौर था जब क्रिकेट मैच बहुत कम खेले जाते थे, द ओवल में खेले गए इस मुकाबले में ग्रेस ने शानदार 152 रन की पारी खेली। ग्रेस ने कुल 22 टेस्ट मैच खेले जिसमें दो शतक व 32.29 के औसत से 1098 रन बनाए। इसके अलावा उनके नाम 9 विकेट भी दर्ज हैं।

सबसे ज्यादा प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाले तीसरे खिलाड़ी

डब्लू जी ग्रेस ने 1865 से 1908 तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भाग लेते रहे, इस दौरान उन्होंने 870 मैच खेले। उनसे ज्यादा विलफ्रेड रोड्स(1110) और फ्रेंक वूली(978) ने सबसे ज्यादा मैच खेले हैं। ग्रेस ने 39.45 के औसत, 124 शतक, 251 अर्द्धशतक और 54211 रन बनाए थे। जबकि उनके नाम गेंदबाजी में 2809 विकेट दर्ज हैं।

ग्रेस की मजबूत बल्लेबाजी तकनीक

विलियम गिलबर्ट ग्रेस की बल्लेबाजी तकनीक उस दौर में बहुत ही कमाल की थी। उनके बारे में एक बार अल्फ्रेड शॉ ने कहा था कि मैं जहां भी चाहता उन्हें वहां गेंदें डालता था और यह बूढ़ा आदमी उसे जहां चाहता वहां मारता था। हालांकि उन्होंने बतौर गेंदबाज एक बार 49 रन देकर सभी 10 बल्लेबाजों को आउट किया था।

मनमौजी थे ग्रेस

क्रिकेट को अमली जामा पहनाने में अहम योगदान देने वाले डब्लू जी ग्रेस बहुत मूडी हुआ करते थे। उन्हें आउट होना नहीं पसंद था, अक्सर उनके आउट होने पर पर गिल्लियां बदल दी जाती थीं और वह खेलते रहते थे। उनकी अच्छी फील्डिंग की वजह भी अजीबोगरीब है, वह बचपन में बहुत शरारती थे। उड़ती चिड़ियों पर कंकड़ फेंकना उनकी आदत थी, उनकी ये आदत क्रिकेट में काम आई और वह अच्छे ऑलराउंडर बने।

51 की उम्र में खेले आखिरी टेस्ट

डब्लू जी ग्रेस ने प्रथम श्रेणी में 17 वर्ष की उम्र में डेब्यू किया था, जबकि 32 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहले टेस्ट मैच खेला था। अंतिम टेस्ट मैच में उनकी उम्र 51 वर्ष की थी, जबकि वह 60 वर्ष तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते रहे।

क्यों पड़ा डॉक्टर नाम

उनके पिता हेनरी मिल ग्रेस डॉक्टर थे और वह डब्लू जी ग्रेस को भी डॉक्टर ही बनाना चाहते थे। इसलिए 1868 में ग्रेस ने ब्रिस्टल मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लिया, हालांकि इस दौरान वह लगातार क्रिकेट खेलते रहे। जिसकी वजह से उन्हें मेडिकल की परीक्षा पास करने में 11 साल लगे और डॉक्टर कहलाए।

विश्वयुद्ध के दौरान हुई थी मौत

डब्लू जी ग्रेस ने 22 टेस्ट मैचों में से आखिरी 13 में इंग्लैंड के कप्तान भी रहे थे। 23 अक्टूबर सन् 1915 में पहले विश्व युद्ध के दौरान केंट में एक हवाई हमले के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई।

ग्रेस के रिकॉर्ड

प्रथम श्रेणी में पहले दो तिहरे शतक लगाने का रिकॉर्ड
इंग्लैड में पहला शतक बनाने के रिकॉर्ड के अलावा डेब्यू में शतक बनाने वाले पहले अंग्रेज क्रिकेटर
प्रथम श्रेणी में 50 हजार रन पूरे करने वाले पहले क्रिकेटर
प्रथम श्रेणी में शतकों का शतक जमाने वाले पहले बल्लेबाज

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