Friday, May 7, 2021
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मजबूत तकनीक होने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फेल हुए है ये 5 इंडियन बल्लेबाज

भारत ने क्रिकेट जगत को कुछ महान बल्लेबाज दिए हैं. रणजी ट्रॉफी प्रतिभाशाली बल्लेबाजों के लिए एक प्लेटफार्म देता हैं. वर्षों से, हमने इस टूर्नामेंट के कई गुणवत्ता वाले बल्लेबाजों को उभरते हुए हैं. हालाँकि कुछ ऐसे भी बल्लेबाज रहे हैं, जो तकनीकी रूप से तो काफी मजबूत रहे हैं हालाँकि अन्तराष्ट्रीय स्तर में उनका प्रदर्शन फीका रहा हैं. आज इस लेख में हम 5 ऐसे खिलाड़ियों के बारे में जानेगे.

5) आकाश चोपड़ा

आकाश चोपड़ा के पास एक तकनीक थी जो एशिया के बाहर टेस्ट के लिए दमदार दिखाई देती थी. दिल्ली के सलामी बल्लेबाज के पास मजबूत तकनीक और लम्बे लम्बे तक क्रीज में खड़े रहना की कला थी लेकिन टेस्ट में उनका प्रदर्शन फीका रहा.

चोपड़ा ने टेस्ट करियर में खेले 10 मैचों की 19 पारियों में 23 की औसत और 2 अर्द्धशतकों की मदद से सिर्फ 437 रन बनाये हैं.

4) शिव सुंदर दास

एक समय पर, टेस्ट में भारत के लिए पारी शुरुआत के लिए शिव सुंदर दास सबसे सही बल्लेबाज लग रहे थे. वह स्टंप के बाहर गेंद को छोड़ने में बहुत अच्छे थे और उनकी पैरों की गति काफी अच्छी थी.

सलामी बल्लेबाज दास उड़ीसा के एकमात्र खिलाड़ी थे जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया. वेस्टइंडीज के खराब दौरे के बाद अपना स्थान गंवाने से पहले दाएं हाथ के खिलाड़ी ने भारतीय टीम में एक नियमित जगह पक्की कर ली थी. लेकिन दुर्भाग्य से, उन्हें फिर कभी भारत के लिए खेलने का मौका नहीं मिला. दास ने भारत के लिए 23 टेस्ट मैचों में 34.89 की औसत और 2 शतकों की मदद से 1326 रन बनाये थे.

3) वसीम जाफर

वसीम जाफर ने भारत के प्रमुख घरेलू टूर्नामेंट में 11,000 से अधिक रन के साथ रणजी ट्रॉफी में सर्वाधिक रन का रिकॉर्ड बनाया. मुंबईकर ने सबसे पहले तब सुर्खियां बटोरीं थी जब उन्होंने अपने दूसरे प्रथम श्रेणी के खेल में तिहरा शतक बनाया था.

दाएं हाथ के बल्लेबाज ने वर्ष 2000 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया, लेकिन उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ख़राब प्रदर्शन किया. वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के अच्छे दौरे होने बाद उन्होंने जब टेस्ट टीम में वापसी की तो वह बेहतर दिखे लेकिन दुर्भाग्य से, उन्होंने गौतम गंभीर के उदय के बाद टीम में अपनी जगह खो दी और फिर वापसी नहीं कर सके.

2) संजय मांजरेकर

संजय मांजरेकर दुनिया के प्रसिद्ध कमेंट्रेटरों में से एक हैं. 1980 के दशक में, बहुत से लोग मानते थे कि उनके पास सुनील गावस्कर की तरह ही तकनीक और कला है. उनके पिता विजय मांजरेकर एक महान क्रिकेटर थे, और संजय के पास भी एक समान तकनीक थी.

संजय की वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के खिलाफ शतकों के साथ करियर की शुरुआत शानदार हुई थी, लेकिन वह इस फॉर्म कोई ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रख आये. वह अपने टेस्ट करियर में सिर्फ एक और शतक बनाने में सफल रहे, जो जिम्बाब्वे के खिलाफ था.

1) मुरली विजय

मुरली विजय ने अपना टेस्ट डेब्यू गौतम गंभीर ले टीम से बाहर होने के बाद किया था. तमिलनाडु के सलामी बल्लेबाज को सहवाग और गंभीर से आगे पहली पसंद सलामी बल्लेबाज बनने के लिए कुछ समय तक इंतजार करना पड़ा था.

जब उसे मौका मिला, तो उसने दोनों हाथों से उसे पकड़ लिया उन्होंने लगातार कई दौरों में अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया. 2016 के बाद से उनका करियर ख़राब हो गया और 2018 में टीम में अपनी जगह गवा दी. दाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने 12 शतक लगायें और टेस्ट में उनका औसत 38.29 रहा, जो उनके कैलिबर के खिलाड़ी के लिए कम है.

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