Sunday, April 18, 2021
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राष्ट्रीय टीम में चुने जाने के बाद भी इन 5 खिलाड़ियों को कभी नहीं मिला डेब्यू का मौका

भारत में क्रिकेट एक धर्म है. क्रिकेट के प्रति देश में दीवानगी इस हद तक हैं कि खिलाड़ी सालों तक मेहनत करते हैं. जिसके बाद घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा करने वाले कुछ चुनिन्दा खिलाड़ियों को टीम इंडिया में चुना जाता हैं लेकिन कुछ ऐसे भी अनलकी प्लेयर्स देखने को मिले हैं, जिन्हें टीम इंडिया में चुना जरुर गया लेकिन कभी भी डेब्यू का मौका नहीं मिल पाया हैं. ऐसे के 5 खिलाड़ियों के बारे में हम इस लेख में जानेगे.

1) दीपक हूडा
Cricket: Deepak Hooda celebrates India call by helping RBI register first win in DY Patil T20 Cup
दीपक हुड्डा ने डीवाई पाटिल टी20 कप में आरबीआई की पहली जीत दर्ज करने के बाद नाम कमाया था. बड़ौदा के हरफनमौला खिलाड़ी हूडा ने 2014 में अंडर-19 विश्व कप के दौरान इस दमदार प्रदर्शन किया. गेंद को हिट करने क्षमता और सुंदर और प्रभावी अंशकालिक ऑफ-स्पिन ने उन्हें आरआर के लिए आईपीएल में अपना पहला अनुबंध दिलाया. आईपीएल 2015 में अपने पहले सीजन में हूडा ने 14 मैचों में 158.94 की स्ट्राइक रेट से 151 रन बनाए. यह इन अभूतपूर्व आंकड़े हैं. जिसके बाद उन्होंने 2017 में श्रीलंका के खिलाफ घरेलू सीरीज के लिए चुना गया था और 2018 में निदाहस ट्रॉफी टी20I टीम में उन्हें चुना गया. हूडा को एक फिनिशर की भूमिका के रूप में चुना गया था वो ऑफ स्पिनर भी करने में सक्षम था लेकिन उन्हें डेब्यू का मौका नहीं दिया गया.

2) बेसिल थम्पी
Basil Thampi Bio, Age, Height, Weight, Wife, Net Worth, salary and more – Power Sportz Magazine
केरल के पेसर बेसिल थम्पी जो गेंद को दोनों तरह से स्विंग करने में माहिर था और लगातार ब्लाक हॉल में उन्हें गेंद डालने की क्षमता ने 2017 में आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट दिलाया. जहां पेसर ने 12 मैचों में 38.54 के औसत और 9.49 के इकोनोमी रेट से 11 विकेट लिए. शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर’ का पुरस्कार भी दिया गया. एक गेंदबाज के रूप में यह दुर्लभ साख है जिसने 2017 में श्रीलंका के खिलाफ घर में खेलने के लिए उसे टी20 टीम में अपना पहला कॉल-अप अर्जित किय. दुर्भाग्य से थम्पी को दीपक की तरह ही सिर्फ टीम में चुना गया लेकिन कभी डेब्यू का मौका नहीं मिल पाया.

3) ईश्वर पांडे

CSK fast bowler Ishwar Pandey hopes to play for the side again
मध्य प्रदेश के लम्बे कद के गेंदबाज ईश्वर पांडे गेंद को स्विंग करने और सतह से उछाल उछालने की क्षमता रखता है. कद के कारण पांडे ने 2012-13 के रणजी सीजन में सिर्फ 8 मैचों में 48 विकेट हासिल करने राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई यही. पांडे को 2014 में न्यूजीलैंड दौरे के लिए वनडे और टेस्ट टीम में चुना गया था, लेकिन सूची में अन्य बड़े खिलाडियों के होने के कारण उन्हें प्लेइंग इलेवन जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा. एक बार जब धोनी ने अपनी कप्तानी छोड़ दी, तो पांडे के रास्ते में मुश्किल पैदा हुई और चयनकर्ताओं के ने उनपर विश्वास खो दिया. इसके आलावा आईपीएल में भी उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा लेकिन इस दौरान वह घरेलू क्रिकेट में लगातार खेलते रहे लेकिन राष्ट्रीय टीम में फिर से कभी नहीं चुने गए.

4) रानादेव बोस
Ranadeb Bose: The spearhead that could have been
बंगाल के एक प्रतिबद्ध क्रिकेटर, जिन्होंने अपने तेज गेंदबाजी के प्रदर्शन का आनंद लिया और विरोधी खेमे में कहर बरपाया, बोस ने घरेलू सर्किट में जबरदस्त सफलता हासिल की. 2006-07 रणजी ट्रॉफी सीज़न जहाँ उन्होंने 39.4 के स्ट्राइक रेट से पेसर ने 8 मैचों में 57 बल्लेबाजों को आउट किया और  चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने में सफलता हासिल की. इसके बाद 2007 में इंग्लैंड का दौरा करने के लिए उन्हें टेस्ट टीम में शामिल किया गया था. यह वास्तव में एक सपना था, लेकिन तेज गेंदबाज, दुर्भाग्य से टीम में चुने जाने के बाद भी अपने इंडिया कैप हासिल में सफल नहीं हो पाए.

5) धीरज जाधव

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मूल रूप से मध्यक्रम के बल्लेबाज जाधव ने महाराष्ट्र के लिए सलामी बल्लेबाज के रूप में शानदार प्रदर्शन किया. उनकी फ्री-फ़्लोटिंग बैटिंग और ऑर्डर के शीर्ष पर सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आक्रमण पर हावी होने की क्षमता के कारण चयनकर्ताओं के रिडार में आए थे. 2004 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे टेस्ट के लिए टीम में चुने जाने के बाद उन्हें अंततः मौका मिला. हालांकि, जाधव ने बदकिस्मत हो गए, क्योंकि उन्हें नजरअंदाज करके गौतम गंभीर को डेब्यू का मौका मिला और उसके बाद जो हुआ वो इतिहास हैं. तब से, जाधव कभी भी राष्ट्रीय टीम में नहीं शैल किए, खब्बू बल्लेबाज ने 111 प्रथम श्रेणी मैचों में 50.85 की औसत से 7679 रन बनाए हैं और 53 लिस्ट ए मैचों में  43.22 के औसत से 2075 रन बनाए.

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