स्पॉट फिक्सिंग केस पर श्रीसंत का खुलासा, बताया पुलिस कैसे टॉर्चर करती थी

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भारतीय टीम इंडिया के तेज गेंदबाज एस श्रीसंत क्रिकेट से पूरी तरह दूर है। साल 2013 की एक घटना ने श्रीसंत की दुनिया को बदल कर रख दिया था। इस दौरान श्रीसंत को स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया। जिसके बाद उन्हें इंडियन क्रिकेट टीम से बाहर का रास्ता दिखाया था लेकिन अब सालों बाद श्रीसंत ने उन दिनों को एक बार फिर याद किया है। श्रीसंत ने उन दिनों को याद करते हुए बताया है कैसे पुलिस ने उन्हें आतंकवादियों के वार्ड में डाल दिया था। इतना ही नहीं, उन्होंने बताया कि पुलिस उनसे रोज 16-17 घंटे तक पूछताछ करती थी। इस दौरान उन्हें काफी टॉर्चर भी किया जाता था।

दरअसल बुधवार को श्रीसंत ने क्रिकेट वेबसाइट क्रिकट्रैकर के साथ वीडियो लाइव के दौरान साल 2013 की घटना पर खुलकर बात की। इस दौरान श्रीसंत ने बताया कि दिल्ली पुलिस मुझसे रोजाना 16-17 घंटे तक पूछताछ करती थी। उस समय मुझे मेरे परिवार से भी मिलने नहीं दिया गया। और ये सब मेरे लिए किसी टॉर्चर से कम नहीं था। मैच पार्टी में ही मुझे गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद मुझे सीधा आतंकवादियों के वार्ड में ले गए। ऐसा लग रहा था कि मुझे बकरा बनाया जा रहा है लेकिन उस मुश्किल घड़ी में मेरा परिवार मेरे साथ खड़ा था। मैं भाग्यशाली हूं कि मेरी फोटो जेल जाते हुए और बाहर आते हुए नहीं ली गई। जिससे मेरे बच्चे वो सब नहीं देख पाएंगे।

श्रीसंत

वहीं इस मौके पर श्रीसंत ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर भी दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सुशांत की मौत मेरे लिए किसी झटके से कम नहीं थी। श्रीसंत ने बताया कि, ‘उस वक्त मैं ट्रेनिंग कर रहा था। इसी बीच मेरी पत्नी का मैसेज आया था लेकिन कार में बैठने के बाद ही मैंने अपनी पत्नी का वॉयस मेल सुना। ये सब मुझे मजाक लग रहा था मैंने सोचा वो मुझसे मजाक कर रही है लेकिन उसके बाद मैंने हर जगह यहीं खबर देखी। जिससे मैं काफी निराश हो गया।’

गौरतलब है कि इससे पहले जब श्रीसंत ने इंटरव्यू दिया था। तो उन्होंने खुलासा किया था कि उन दिनों वह इतने परेशान थे कि उन्होंने आत्महत्या के बारे में भी सोच लिया था। उन्होंने बताया था कि मेरी जिंदगी में एक ऐसा भी समय आया था जब मैं आत्महत्या का विचार कर रहा था लेकिन आज मुझे ये बताते हुए बिल्कुल भी शर्म नहीं आ रही है। मैंने अपनी जिंदगी में सकारात्मक चीजें की है। मैं अपनी जिंदगी के उस समय को डार्क फेस नहीं कहूंगा। लेकिन ये तिहाड़ जेल से भी खराब था।

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