Sunday, August 1, 2021
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दुनिया का इकलौता बल्लेबाज जिसने वनडे मैच में लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे धीमी पारी खेली

जरा सोचिए किसी टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 334 रन का स्कोर खड़ा कर दिया तो सामने वाली टीम के बल्लेबाज क्या करेंगे, चलिए टीम इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 50 नहीं 60 ओवर मिले, जो बाद में बल्लेबाजी करने वाली टीम की रणनीति क्या होगी।

सही सोच रहे हैं, आप कि अगर इतना बड़ा लक्ष्य हासिल करना है तो उस टीम के ओपनर को तेज तर्रार शुरुआती दिलानी होगी लेकिन आपको पता है कि दुनिया के महान बल्लेबाजों में शुमार एक खिलाड़ी ने इस मैच में 174 गेंद खेलकर केवल 36 रन बनाए थे, मजेदार बात तो है कि वह अंत तक नाबाद रहे।

चलिए आपका ज्यादा समय नहीं लेते हुए हम आपको उस बल्लेबाज का नाम बताते हैं। ये बल्लेबाज है भारत के पूर्व ओपनर सुनील गावस्कर। ये नाम देख कर आप जरूर चौंक गए होंगे लेकिन ये सच है। खुद सुनील गावस्कर को यकीन नहीं होता कि वह ऐसी पारी कैसे खेल सकते हैं।

वो दिन था 7 जून 1975, प्रडेंशियल कप का मैच लॉर्ड्स में चल रहा था और इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 60 ओवर में 334 रन का स्कोर बनाया। इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज डेनिस एमिस ने 137 रन की बेहतरीन पारी खेली थी जिसमें 18 चौके शामिल थे.

इतने बड़े स्कोर का पीछा करने वाली टीम इंडिया की शुरुआत बेहद धीमी रही। गावस्कर ने बड़े शॉट खेलने की कोशिश की लेकिन वह लगातार ऐसा करने में असफल रहे, यहां तक एक बार तो वह जानकर आउट होना चाह रहे थे लेकिन किस्मत ऐसी की, ऐसा भी नहीं हो पाया।

भारतीय ओपनर ने 174 गेदों में केवल 36 रन ही बनाए। अपनी इस बेहद धीमी पारी में उन्होंने केवल एक ही चौका मारा था। गावस्कर की इस पारी के कारण भारतीय टीम केवल 3 विकेट खोकर केवल 132 रन के स्कोर तक ही पहुंच पाई थी। जिसकी वजह से भारतीय टीम को 202 रन से हार झेलनी पड़ी।

उस पारी के बाद गावस्कर की हर तरफ आलोचना हो रही थी, मीडिया तो उनके खिलाफ थी ही, उनके टीम के साथी भी उनसे काफी नाराज हुए।

उस मैच का हिस्सा रहे अंशुमन गायकवाड़ ने कहा कि सच में हमें बिल्कुल समझ नहीं आ रहा कि आखिर हो क्या रहा है, हालांकि उन्होने ये भी बताया कि उस पारी के बाद गावस्कर ने किसी से बात नहीं की और चुपचाप अकेले बैठ गए।

इसके अलावा उस वक्त टीम के मैनेजर जी.एस रामचंद्र ने बीसीसीआई से गावस्कर की शिकायत करते हुए कहा कि उनकी इस पारी से टीम के मनोबल पर प्रभाव पड़ा है।

सुनील गावस्कर ने अपनी आत्मकथा “सनी डेज” में यह माना भी है कि ये पारी उनके करियर की सबसे खराब पारी है। बल्लेबाजी के वक्त वो चाह रहे थे कि विकेट को छोड़ दे ताकि बोल्ड हो सके और मैदान से बाहर आ जाएं लेकिन किस्मत देखिए ऐसा भी नहीं भी नहीं हुआ।

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