Arthur Henderson Cricket Field Shooting: क्रिकेट के इतिहास में खिलाड़ियों की मौत से जुड़ी कई दर्दनाक घटनाएं दर्ज हैं। किसी ने बीमारी के कारण जान गंवाई, कोई सड़क हादसे का शिकार हुआ तो किसी खिलाड़ी की मौत मैदान पर लगी चोट की वजह से हुई। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे क्रिकेटर के बारे में सुना है, जिसकी एक सामान्य क्रिकेट मैच के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई हो? हैरानी की बात यह है कि यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में हुई एक वास्तविक घटना है।
इस अनोखी और भयावह घटना की चर्चा एक बार फिर तब शुरू हुई, जब ऑस्ट्रेलिया में फिल हेंडरसन नाम के व्यक्ति का 77 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। फिल का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से कोई संबंध नहीं था, लेकिन उनका परिवार क्रिकेट इतिहास के एक ऐसे हादसे से जुड़ा था, जिसे शायद ही कोई भूल पाए। वह कैप्टन आर्थर फ्रांसिस हेंडरसन के आखिरी जीवित बेटों में से एक थे। आर्थर की 1952 में क्रिकेट मैदान पर फील्डिंग करते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
13 फरवरी 1952: जब क्रिकेट मैदान अचानक गोलियों की आवाज से गूंज उठा
यह घटना 13 फरवरी 1952 की है। ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड स्थित रेलवे ओवल मैदान पर साउथ ऑस्ट्रेलियन कंट्री वीक टूर्नामेंट का मुकाबला खेला जा रहा था। आज इस मैदान को कैरेन रोल्टन ओवल के नाम से जाना जाता है। यहां बाद में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबले भी आयोजित हुए।
मैदान पर अपर नॉर्थ और साउथ ईस्ट की टीमें आमने-सामने थीं। अपर नॉर्थ की तरफ से खेल रहे 33 वर्षीय कैप्टन आर्थर हेंडरसन कवर पॉइंट पर फील्डिंग कर रहे थे।
आर्थर ऑस्ट्रेलियाई सेना में कैप्टन थे और उनकी तैनाती नई स्थापित वूमेरा रॉकेट रेंज में थी। वह शादीशुदा थे और उनके तीन छोटे बच्चे थे। क्रिकेट के प्रति उनका खास लगाव था और वह अपने इलाके में एक लोकप्रिय खिलाड़ी माने जाते थे।
यह मुकाबला उनकी टीम के लिए दूसरा मैच था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यही उनका आखिरी मैच साबित होगा।
फील्डिंग करते समय पीछे से लगी गोली, मैदान पर मच गई अफरा-तफरी
मैच शुरू हुए लगभग आधा घंटा ही बीता था कि अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। उस समय ओपनिंग बॉलर सार्जेंट लेस पैट्रोनी गेंदबाजी कर रहे थे।
गोली कवर पॉइंट पर तैनात आर्थर हेंडरसन को पीछे से लगी और उनके शरीर को पार करते हुए दिल तक पहुंच गई। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
खिलाड़ियों को पहले कुछ समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। लेकिन कुछ ही देर बाद दूसरी गोली चली। इस बार अपर नॉर्थ के एक अन्य खिलाड़ी रॉन रीड इसकी चपेट में आ गए और उनके कंधे में गोली लगी।
इसके बाद भी फायरिंग जारी रही। मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों और दर्शकों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। जान बचाने के लिए खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम की तरफ भागने लगे।
एक क्रिकेट मैच देखते ही देखते खौफनाक घटना में बदल चुका था।
कौन था वह हमलावर जिसने क्रिकेट मैदान पर की थी फायरिंग?
फायरिंग करने वाले व्यक्ति की पहचान 24 वर्षीय एलियास गाहा के रूप में हुई। वह लेबनान से ऑस्ट्रेलिया आया हुआ था और उसके पास .303 राइफल थी।
बाद में सामने आई जानकारी के मुताबिक, गाहा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह पहले विक्टोरिया के एक मानसिक अस्पताल में भी रह चुका था। जनवरी 1952 तक वह एडिलेड पहुंच चुका था और अपने पास सेना की एक पुरानी राइफल रखता था।
बताया जाता है कि घटना वाले दिन सुबह वह कॉमनवेल्थ इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के कार्यालय पहुंचा था। वहां अधिकारियों के साथ उसकी बहस हुई थी। उसने सरकार पर अपने खिलाफ साजिश रचने जैसे आरोप भी लगाए थे।
इस विवाद के लगभग एक घंटे बाद वह क्रिकेट मैदान पहुंचा और वहां मौजूद खिलाड़ियों पर गोली चलानी शुरू कर दी।
डिटेक्टिव जॉन जाइल्स ने दिखाई बहादुरी, हमलावर को दबोचा
जब मैदान पर गोलियां चल रही थीं, उसी दौरान वहां संयोग से मौजूद डिटेक्टिव जॉन जाइल्स ने हमलावर को रोकने की कोशिश की।
जाइल्स ने अपनी जान की परवाह किए बिना गाहा से मुकाबला किया। काफी संघर्ष के बाद उन्होंने सेना के अन्य अधिकारियों की मदद से उसे काबू में कर लिया और राइफल छीन ली।
इसके बाद पुलिस ने गाहा को गिरफ्तार कर लिया। आर्थर की हत्या और दूसरे खिलाड़ी पर हुए हमले के बाद मामला अदालत तक पहुंचा।
अदालत ने मानसिक रूप से बीमार माना, बाद में लेबनान भेजा गया
मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी की मानसिक स्थिति को लेकर अहम सवाल उठे। उसके वकील ने अदालत में दलील दी कि घटना के समय गाहा की मानसिक हालत सामान्य नहीं थी।
आखिरकार अदालत ने उसे मानसिक रूप से बीमार घोषित कर दिया और उसे मानसिक अस्पताल भेजने का आदेश दिया। बाद में उसे ऑस्ट्रेलिया से लेबनान निर्वासित कर दिया गया।
इस घटना ने पूरे ऑस्ट्रेलिया में सनसनी फैला दी थी। एक क्रिकेट मैच के दौरान किसी खिलाड़ी की इस तरह हत्या होना बेहद असाधारण मामला था।
तीन साल का था फिल, पिता की यादों को जिंदगीभर संजोता रहा
आर्थर हेंडरसन की मौत के बाद उनकी पत्नी जॉयस और तीन बेटे जॉन, मिक और फिल परिवार में रह गए। जब पिता की हत्या हुई, तब फिल की उम्र तीन साल भी नहीं थी।
आर्थर का अंतिम संस्कार सेना ने पूरे सम्मान के साथ सेंटेनियल पार्क में कराया था। इस घटना के सदमे के कारण कंट्री वीक टूर्नामेंट भी कुछ वर्षों तक आयोजित नहीं हुआ, हालांकि बाद में यह दोबारा शुरू हो गया।
समय बीतने के साथ आर्थर के तीनों बेटे बड़े हुए। फिल ने भी अपने पिता की तरह सेना में करियर चुना। लेकिन पिता की कहानी जानने की उत्सुकता उन्हें हमेशा रही।
उन्होंने अपने पिता की तस्वीरें, पुराने दस्तावेज और उनसे जुड़ी यादें इकट्ठा करनी शुरू कर दीं। परिवार का वंशवृक्ष तैयार किया और उन लोगों से संपर्क किया, जो आर्थर को जानते थे। उन्होंने वर्चुअल वॉर मेमोरियल ऑस्ट्रेलिया के माध्यम से भी अपने पिता से जुड़ी जानकारियां जुटाईं।
इसी कोशिश में उन्हें पता चला कि क्रिकेट उनके पिता की जिंदगी का कितना महत्वपूर्ण हिस्सा था। आखिरकार जिस खेल से उन्हें सबसे ज्यादा लगाव था, उसी मैदान पर उनकी जान चली गई थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज था मौत का हैरान करने वाला कारण
आर्थर हेंडरसन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी मौत का कारण दिल में लगी गोली बताया गया था।
लेकिन इस रिपोर्ट में एक और बात दर्ज थी, जिसने इस घटना को क्रिकेट इतिहास के लिए और भी खास बना दिया। जब मौत का स्थान पूछा गया तो जवाब में लिखा था- क्रिकेट ग्राउंड।
यही वह तथ्य है जो आर्थर हेंडरसन को क्रिकेट इतिहास की सबसे असाधारण मौतों में शामिल करता है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, वह ऐसे इकलौते ज्ञात क्रिकेटर हैं जिनकी एक मैच के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई।
आखिर Wisden ने क्यों नहीं दी इस क्रिकेटर को जगह?
इस पूरी घटना से जुड़ा एक सवाल आज भी क्रिकेट इतिहास के जानकारों को हैरान करता है। क्रिकेट की दुनिया में प्रतिष्ठित माने जाने वाले ‘विजडन क्रिकेटर्स अल्मनैक’ में आर्थर हेंडरसन की मौत को वह जगह क्यों नहीं मिली, जिसकी इस घटना को जरूरत थी?
इतनी बड़ी घटना के बावजूद विजडन के ऑबिचुअरी कॉलम में उनका जिक्र नहीं किया गया।
बाद में जब इस पर सवाल उठे तो विजडन की ओर से बताया गया कि आर्थर एक पेशेवर सेना अधिकारी और शौकिया कंट्री वीक क्रिकेटर थे। वह प्रथम श्रेणी या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेलते थे। इसी वजह से उन्हें क्रिकेटर्स अल्मनैक के ऑबिचुअरी सेक्शन में शामिल नहीं किया गया।
यह जवाब कई लोगों के लिए हैरान करने वाला था। क्रिकेट जगत में विजडन की प्रतिष्ठा को देखते हुए सवाल उठता रहा कि एक क्रिकेट मैच के दौरान हुई हत्या जैसी असाधारण घटना को इतिहास के इस महत्वपूर्ण प्रकाशन में जगह क्यों नहीं मिली।
70 साल बाद भी उस दिन को नहीं भूले लोग
इस घटना को सात दशक से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन उस दिन मैदान पर मौजूद लोगों के लिए वह दृश्य आज भी एक भयावह याद है।
सफेद कपड़ों में क्रिकेट खेल रहे खिलाड़ी, गर्मी की एक सामान्य सुबह और अचानक गोलियों की आवाज। कुछ ही पलों में मैदान पर एक खिलाड़ी की लाश पड़ी थी और बाकी लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे।
फिल हेंडरसन का निधन इस पुराने घटनाक्रम की आखिरी पारिवारिक कड़ी को भी चर्चा में ले आया है।
क्रिकेट के इतिहास में आर्थर हेंडरसन का नाम शायद बड़े रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में नहीं मिलता, लेकिन उनकी मौत की कहानी इस खेल के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसे भुलाया नहीं जाना चाहिए।









